एफआईआर क्या है और कैसे करें, FIR full form in Hindi, FIR meaning in Hindi

एफ आई आर एक बहुत common word जिसके बारे में सुनकर अक्सर लोगों को थोड़ा बहुत डर लगनें लगता है लेकिन यदि आप सच्चे व्यक्ति हैं आपनें कोई गलती नहीं की है तो आपको एफ आई आर से डरनें की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है आप निश्चिंत होकर एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं।

हर जगह कोई ना कोई अपराध होता रहता है ऐसी घटनाएं होती रहती है जिससे बहुत से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में समस्या होती है उसका निवारण करना।

ऐसे में अधिकतर cases में एफ आई आर उनका निवारण करनें में कारगर साबित होती है क्यूंकि लोग किसी ordinary व्यक्ति की बातों को नहीं मानते हैं लेकिन एक police की बातों को उन्हें मानना ही पड़ता है।

तो यदि आपके साथ भी कोई दुर्घटना हुयी है किसी से आपकी लड़ाई हुयी है तो आप उसको स्वयं से निपटानें के बजाय एफ आई आर करें जिससे की उस मामले को हल करनें के लिए police आपकी मदद कर सके।

What is FIR in hindi

एफ आई आर का फुल फॉर्म First Information Report होता है जिसका हिंदी में मतलब “प्राथमिक सूचना रिपोर्ट” होता है, FIRst information report का मतलब होता है, सबसे पहले उस जानकारी, घटना, अपराध की report करना ताकि वो अपराध और अधिक ना बढे और उस मामले को क़ानूनीं कार्यवाही से निपटा जा सके।

एफ आई आर का सीधा मतलब होता है की किसी भी घटना के घटित होनें पर सबसे पहले उस बारे में report दर्ज कराना क्यूंकि यदि समय रहते उस मामले की एफ आई आर की जाती है तो उस मामले को कानूनी तरीके से और जल्द से जल्द निपटाया जा सकता है।

लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि मामले हद से बाहर हो जाते हैं तो ही कोई एफ आई आर करता है लेकिन कोई बात नहीं देर से ही सही लेकिन यदि आपके साथ ऐसा कुछ घटित होता है तो एफ आई आर जरूर दर्ज कराएं ताकि वो मामला और अधिक ना बढ़नें पाए।

एफ आई आर का मतलब एक ऐसे document से होता है जोकि किसी व्यक्ति द्वारा थाने में शिकायत के रूप में note कराया जाता है वैसे तो लिखित रूप से एफ आई आर दर्ज करानें की जरुरत तब पड़ती है जब मामला कुछ गंभीर हो।

अन्यथा अधिकतर cases के लिए मौखिक रूप से शिकायत यानीं की एफ आई आर के जरिये मामले का निवारण हो जाता है, लेकिन यदि आप चाहें तो normal cases के लिए भी लिखित एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं।

लेकिन याद रहे यदि मौखिक रूप से शिकायत की जाती है तो उसे हम एफ आई आर कह सकते हैं लेकिन वो बस वो एक report होगी।

क्यूंकि most cases में process करनें के लिए एफ आई आर copy की भी जरुरत पड़ती है और यदि आप मौखिक रूप से एफ आई आर करते हैं तो उसका आपके पास कोई evidence नहीं होगा की आपनें एफ आई आर दर्ज करवाया था।

क्यूंकि एफ आई आर उस document को कहते हैं जोकि police द्वारा उस घटना या अपराध के बारे में लिखित रूप से दर्ज किया जाता है और इस एफ आई आर की copy को आगे की process में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन आप सभी तरह के cases में लिखित एफ आई आर नहीं दर्ज करवा सकते हैं।

एफ आई आर दर्ज करवाने के लिए स्थितियां

हो सकता है की आपको doubt हो की आप कभी भी किसी भी condition में एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है आप सभी cases में लिखित एफ आई आर नहीं दर्ज करवा सकते हैं बल्कि कुछ cases में आपको मौखिक एफ आई आर करनीं पड़ सकती है।

संज्ञेय अपराध

संज्ञेय अपराध यानीं की बड़े अपराध जोकि प्रत्यक्ष रूप से किसी को नुकसान पहुंचा रहे हों जैसे की जैसे की murder, रेप, गोली चलाना, इत्यादि, यदि कोई भी संज्ञेय अपराध हुवा है तो उसकी लिखित एफ आई आर दर्ज होगी, और यदि किसी व्यक्ति की एफ आई आर दर्ज हो जाती है तो उसपर काफी सारे प्रतिबन्ध लग जाते हैं।

असंज्ञेय अपराध

असंज्ञेय अपराध वो अपराध होते हैं जो normal या मामूली अपराध होते हैं जैसे की जमीनीं विवाद, सामान्य घरेलु विवाद, मामूली मारपीट इत्यादि, इस condition में सिर्फ मौखिक एफ आई आर की जा सकती है एफ आई आर लिखित रूप से नहीं दर्ज की जाएगी।

और मामले को उचित तरीके से सुलझानें का प्रयाश किया जायेगा, लेकिन यदि असंज्ञेय अपराध के बाद भी FIR नहीं की जाती है तो ये संज्ञेय अपराध में भी बदल सकता है।

क्यूंकि छोटी छोटी लड़ाइयाँ, छोटे छोटे मामले बहुत जल्दी, सिर्फ एक ही क्षण में ही बहुत बड़े हो जाते हैं तो जाहिर सी बात है की यदि मामला संज्ञेय हो गया है तो एफ आई आर भी दर्ज की जाएगी।

एफ आई आर दर्ज होने के बाद क्या होता है

वैसे तो यदि आपके खिलाफ कोई असंज्ञेय एफ आई आर करता है तो उससे आपको future में कोई problem नहीं होगी लेकिन यदि एक बार आपके खिलाफ संज्ञेय एफ आई आर होती और एफ आई आर लिखित रूप से दर्ज होती है तो आप पर कुछ प्रतिबन्ध लागू हो जायेंगे।

जैसे की government jobs आपके लिए प्रतिबंधित हो जाएँगी, यदि आप कभी passport बनवाना चाहते हैं तो हो सकता है की आपके record की वजह से आपका passport ना issue किया जाए।

और लगभग हर उस काम में प्रतिबन्ध लग जायेगा जिसके लिए आपके doucments को आपके police station से verify किये जाते हैं, इसलिए यदि आपका target government job हासिल करना है तो आपको संज्ञेय अपराधों से बचकर रहना होगा नहीं तो आपका career बर्बाद हो सकता है।

फिर वो एफ आई आर किसी भी प्रकार की हो सकती है, जी हाँ किसी भी प्रकार की क्यूंकि एफ आई आर एक नहीं बल्कि multiple type के होते हैं और वो भी विभिन्न प्रकार की condition के लिए, तो चलिए जानते हैं की एफ आई आर कितनें प्रकार के होते हैं और किस condition में किस type की एफ आई आर दर्ज कराई जा सकती है।

एफआईआर कितने प्रकार के होते हैं

Regular एफ आई आर

Regular या classic कुछ भी कह सकते हैं classic एफ आई आर उन एफ आई आर को कहते हैं जो हम अपनें block के पुलिस station पर दर्ज करवाते हैं क्यूंकि सभी थानों के लिए एक सीमा होती है और जिस सीमा के अंदर अपराध होते हैं वहां की police उस case को handle करती है

फिर चाहे वो किसी भी तरह का अपराध हो संज्ञेय या असंज्ञेय लेकिन मान लीजिए कि आप कहीं बाहर गए हैं और वहां आपके साथ कोई हादसा हो जाता है तो आप क्या करेंगे, क्या आपको दूसरे police stations से मदद मिल सकती है, जी हां बिल्कुल, उसके लिए zero FIR का प्रावधान है

Zero एफआईआर क्या है

एफ आई आर दो प्रकार के होते हैं वैसे तो लगभग हमेशा regular एफ आई आर दर्ज किया जाता है लेकिन कुछ cases में जब हम कहीं बाहर होते हैं और हमारे साथ कोई घटना हो जाती है तो ये जरूरी होता है कि बिना देर किए उसकी एफ आई आर दर्ज कराई जाए।

और हां अब इस case में ये जरूरी नहीं है कि आप अपनें ही police station जाएं, बल्कि जरूरी होता है कि निकटवर्ती police station में एफ आई आर दर्ज कराई जाए, क्यूंकि देर करनें से सबूतों के मिटने के chances होते हैं इसलिए जरूरी होता है कि अपनें निकटवर्ती police station में फिर दर्ज कराएं।

फिर चाहे आप उस police station के अधिकार क्षेत्र के निवासी हो या ना हों, फिर चाहे वो अपराध उस police station के अधिकार क्षेत्र में हो या ना हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है

और इस तरह के case में दर्ज हुई एफ आई आर को zero एफ आई आर कहते हैं जिसे बाद में अधिकार क्षेत्र के police station में refer कर दिया जाता है।

Zero एफ आई आर का मुख्य उद्देश्य ये है कि अपराध पर तुरंत कार्यवाही फिर चाहे वो area उस police station के अधिकार क्षेत्र में हो या ना हो

Zero एफ आई आर के क्या फायदे हैं

यदि अपराध/मामला संज्ञेय है तो जाहिर सी बात है कि एफ आई आर तो दर्ज होगी, और zero एफ आई आर ka सबसे बड़ा फायदा ये है कि नजदीकी police station में उस मामले की एफ आई आर दर्ज कराई जा सकती है और police उस मामले कि जल्द से जल्द पड़ताल करेगी

क्यूंकि कई बार ऐसा होता है कि देर से एफ आई आर करनें की वजह से साक्ष्य मिट गए होते हैं या मिटा दिए गए होते है इसलिए यदि अपनें police station के सीमा क्षेत्र में नहीं है तो नजदीकी police station में zero FIR दर्ज करवा सकते हैं जिससे उस सीमा क्षेत्र की police मामले के साक्ष्य को collect करेगी और जरूरत पड़ने पर उचित कदम भी उठाएगी।

और जल्द ही उस case को संबंधित police station में refer कर देगी।

एफ आई आर कैसे दर्ज कराएं

एफ आई आर कई तरीकों से दर्ज कराई जा सकती है, जहां तक बात है असंग्येय मामलों की तो आप police को call करके report कर सकते हैं, घटनास्थल पर बुला सकते हैं या चाहें तो direct police station जाकर भी एफ आई आर कर सकते हैं

लेकिन संज्ञेय मामलों में multiple तरीके से action लिया जा सकता है, और वो उस अपराध पर depend करता है कि अपराध कितना संगीन है

सबसे पहले चाहें तो कार्यवाही के लिए police को call करके भी बुला सकते हैं, जिससे कि तुरन्त कार्यवाही कि जा सके और फिर एफ आई आर भी दर्ज करवा सकते हैं, या फिर आप इस condition में नहीं है कि police station जा सकें एफ आई आर दर्ज करवाने तो आप उस मामले के किसी चश्मदीद को भी एफ आई आर दर्ज करवाने भेज सकते हैं

यदि police station में आपकी एफ आई आर ना दर्ज की जाए तो क्या करें

लोगों को police station जानें में काफी झिझक महसूस होती, भले ही किसी दूसरे के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने जा रहे हों, लेकिन खुद को भी थोड़ा बहुत डर लगता है लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यदि आपकी गलती नहीं है तो आपको डरने की बिल्कल भी जरूरत नहीं है, आप निश्चिंत होकर police station जाइए और एफ आई आर दर्ज करवाएं, फिर चाहे वो मौखिक हो लिखित

क्यूंकि police अपराध की condition के अनुसार ही decide करेगी कि लिखित एफ आई आर दर्ज करना है या मौखिक

लेकिन यदि आपकी एफ आई आर नहीं दर्ज की जा रही है या या report दर्ज करनें के बाद कोई कारवाही नहीं कि जा रही है तो आप उस police station की भी शिकायत कर सकते हैं ।

आप लिखित में जिले के SP से शिकायत कर सकते हैं कि आपकी एफ आई आर नहीं दर्ज की जा रही है या FIR दर्ज करनें के बाद उसपर कोई action नहीं लिया जा रहा है

आप लिखित में दे सकते हैं कि आप किस police station में एफ आई आर दर्ज करवाने गए थे, या report दर्ज होने के बाद कोई action नहीं लिया जा रहा है, साथ में आपको ये भी बताना होगा कि आप कब गए थे FIR दर्ज कराने।

Definitely sp के आदेश के बाद उन्हें आपकी FIR दर्ज करना ही पड़ेगा और मामले कि जांच भी तुरंत करनी पड़ेगी, क्यूंकि अपनी नौकरी कोई गंवाना नहीं चाहेगा ।

लेकिन शायद इसकी नौबत ना आए क्यूंकि जब कोई भी मौखिक या लिखित एफ आई आर करनें जाता है तो police उस मामले को हल करने के लिए जल्द से जल्द पहुंच जाती है, बहुत कम ही ऐसा होता है कि आप FIR दर्ज कराने जाएं और आपकी एफ आई आर दर्ज ना की जाए।

एफ आई आर के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

कोई भी आपराधिक घटना होनें पर जल्द से जल्द उसकी एफ आई आर दर्ज कराना जरुरी होता है जितना अधिक देर की जाएगी मामला उतना ही जटिल होता जायेगा और यदि आपको किसी मामले की report दर्ज कराने में देर हो गयी है तो कोई बात आप अभी भी बिना किसी हिचकिचाहट के police station जाकर एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं, और यदि आपसे पूंछा जाता है की आपनें FIR दर्ज करवाने में देर क्यों की तो आप वो कारण बता सकते हैं जिस वजह से आपनें FIR दर्ज करवाने में देर की

एफ आई आर copy पर एफ आई आर दर्ज करवानें वाले का signature और थानाध्यक्ष द्वारा उस copy का प्रमाणित होना जरुरी है, आप चाहें तो एफ आई आर की एक copy खुद भी मांग सकते हैं और उन्हें आपको उस एफ आई आर की एक copy देना भी पड़ेगा क्यूंकि FIR का नियम ही यही है।

एफ आई आर copy में वही statement दर्ज होगा जो एफ आई आर दर्ज करवानें वाला व्यक्ति कहेगा, उसमें police अपनीं तरफ से कोई परिवर्तन नहीं कर सकता है, यदि police उस एफ आई आर में खुद से कोई परिवर्तन करता है तो ये गैर कानूनी होगा आप उसे ऐसा करने से रोक सकते हैं।

कुछ cases में police बिना एफ आई आर दर्ज किये जाँच पड़ताल कर सकती है क्यूंकि हर एक तरह के घटना में एफ आई आर नहीं लिखा जाता है जैसे की असंज्ञेय अपराध, लेकिन यदि संज्ञेय अपराध हुवा है तो तुरंत ही उसकी लिखित एफ आई आर दर्ज होनीं चाहिए और कार्यवाही होनीं चाहिए

एफ आई आर दर्ज करवानें के लिए जरुरी नहीं है की अपराध का शिकार हुवा व्यक्ति ही एफ आई आर दर्ज करवाए बल्कि उसका कोई भी relative, friend, family member इत्यादि कोई भी व्यक्ति लिखित में एफ आई आर दर्ज करवा सकता है।

हालाँकि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ कोई आपराधिक घटना हुयी है तो कोई random क्यक्ति भी एफ आई आर दर्ज करवा सकता है लेकिन शायद ऐसा बहुत कम ही होता है क्यूंकि ये थोड़ा लम्बी process भी हो सकती है ये इस बात पर depend करता है की अपराध किस type का हुवा है।

इस आर्टिकल से आपने सीखा FIR kya hai और FIR full form in hindi, FIR meaning हमें उम्मीद है ये जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी

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