सिम कार्ड क्या है, SIM full form in Hindi

सिम कार्ड दुनिया की कुछ top चीजों की list में शामिल है क्यूंकि फिर चाहे call करना हो या internet use करना हो सिम कार्ड necessary है, तो almost 99 percent लोग SIM name से परिचित हैं फिर भले है उन्हें SIM card के बारे में deep जानकारी हो या ना हो वो अलग बात है।

लेकिन शायद 10 percent लोगों को भी नहीं पता होगा कि का फुल फॉर्म नहीं पता होता तो यदि आपको भी नहीं पता है कि सिम का फुल फॉर्म नहीं पता है तो don’t worry यहां आपको जानकारी मिल जाएगी।

What is SIM card in Hindi, Sim card kya hai

Sim card kya hai full form in hindi

SIM का full form Subscriber Identity Module OR Subscriber Identification Module होता है सिम कार्ड एक subscriber module है जिसका इस्तेमाल telecom companies द्वारा ग्राहक के identification के लिए किया जाता है, सिम कार्ड telecom company द्वारा provide किए गए key और data को safe रखता है, जो ग्राहक की id को प्रमाणित करता है और प्रामाणिकता के लिए सभी SIM cards को एक number provide किया जाता है।

जिसे हम mobile number के नाम से जानते हैं, सिम कार्ड जिस phone में insert किया जाता है उस फोन के बारे में वो सिम कार्ड काफी सारी information collect कर सकता है।

जिसे telecom companies बहुत ही easily देख सकती है क्यूंकि वो सिम कार्ड उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया होता है।

सिम कार्ड का इस्तेमाल मुख्य रूप से ग्राहक के identification और subscription के लिए किया जाता है, और उस सिम कार्ड पर provide की गई company की services को आप subscribe कर सकते हैं जिसके लिए आपको charge देना पड़ेगा, सभी company के charges अलग हो सकते हैं।

वैसे तो vertual identification भी हो सकता है लेकिन vertual subscription और identification के लिए भी internet connection required होता है और आप बिना सिम कार्ड के internet नहीं access कर सकते हैं क्यूंकि वो telecom company ही आपको internet provide करती है जिसका आप सिम कार्ड use करते हैं।

तो इसलिए यदि आप चाहें तो कुछ temporary कार्यों के लिए vertual subscription identity use कर सकते हैं लेकिन याद रहे वो सिर्फ और सिर्फ temporary होगा।

यदि आप चाहें तो internet पर “vertual mobile number” type करके search कर सकते हैं आपको बहुत से vertual mobile number provider मिल जायेंगे।

Sim ka aavishkar kab aur kisne kiya

दुनिया का सबसे पहला सिम कार्ड Giesecke & Devrient द्वारा 1991 में invent किया था लेकिन उस time दो प्रकार के सिम कार्ड प्रस्तुत किये गए, एक का size काफी बड़ा था, credit card के size का और दूसरा छोटे आकर में था।

और सबसे पहले 300 सिम कार्ड एक Finnish wireless network operator को बेचा गया था जिसका name है Radiolinja, चूंकि उस time SIMe card हाल ही में develop किये गए थे तो उस time के SIM cards की capacity बहुत कम होती थी, उसमें आप बहुत ही कम contacts save करके रख सकते थे बहुत ही कम messages store कर सकते थे।

लेकिन कोई बात नहीं उस time सिम कार्ड invent हुवा था यही बहुत बड़ी बात है क्यूंकि कोई भी चीज invention के time ही बहुत बेहतर नहीं होती है बल्कि उसमें धीरे धीरे improvement किये जाते हैं और कुछ time बाद वो काफी better हो जाते हैं।

और ऐसा ही सिम कार्ड के साथ हुवा, लगातार सिम कार्ड में improvement किये जिससे की आप इस time के सिम कार्ड देख सकते हैं कितनें advanced हैं।

सिम कार्ड की size

और जहाँ तक बात है सिम कार्ड के size की तो आप इसकी size खुद ही देख सकते हैं, first time ये credit/debit card के size का था और आज सबसे छोटी SIM आपको nano size में मिल जाएगी, इस time के अधिकतर phone में nano सिम कार्ड का ही option available है।

First time credit card के size का, और हाल ही में Mini (standard size) सिम कार्ड, उसके बाद जब से android phone का trend आया सिम कार्ड की size को लगातार दो बार कम किया गया।

क्यूंकि बहुत ही android phone manufacturer companies ने अपने phones में micro SIM card slot देना start कर दिया, हालाँकि शुरुवाती दौर में बहुत सी companies standard size के सिम कार्ड slot देते थे लेकिन धीरे धीरे सभी companies ने micro सिम कार्ड slot का option अपना लिया।

और साथ ही बहुत ही sompanies ने उनके phone के सिम कार्ड slot को nano कर दिया, इस time आपको अधिकतर phones में nano सिम कार्ड slot ही मिलेंगे, और कुछ phones में nano + Micro, अब नए बनाये जा रहे phone से standard SIM card slot को पूरी तरह से हटा दिया जा रहा है।

Esim kya hai

वैसे तो अब ESim काoption भी available है जिससे की आपको बाहर से सिम कार्ड डालनें की जरुरत नहीं होगी लेकिन शायद ये उतना effective नहीं है और eSIM वाले phone शायद लोगों को पसंद भी नहीं आएंगे।

Embedded Subscriber Identity Module

eSIM का full form भी same वही है बस इसमें embedded add किया गया है क्यूंकि eSIM phones में पहले से ही installed रहती है।

जी हाँ eSIM phones में पहले से ही installed रहती है लेकिन इसपर कोई भी mobile number registered नहीं होता है, इसपर mobile number phone खरीदनें के बाद register करवाया जाता है।

और यदि आप eSIM के बारे में मेरा opinion चाहते हैं तो बस मैं इतना ही कहना चाहूंगा की मुझे तो eSIM card बिलकुल भी पसंद नहीं है क्यूंकि यदि हम eSIM card phone use करते हैं तो हम ना ही सिम कार्ड निकाल सकते हैं और ना ही उसमें कोई दूसरा SIM card insert कर सकते हैं।

और हर किसी को अक्सर जरुरत पड़ती है सिम कार्ड निकलनें या दूसरा सिम कार्ड insert करनें की, इसलिए शायद eSIM की demand कभी भी नहीं बढ़ेगी, और normal SIM card ही demand में रहेंगे।

Phone के सिम कार्ड slot में changes

एक समय हमें phone में सिम कार्ड insert करनें के लिए phone को open करना पड़ता था उसकी battery remove करना पड़ता था तभी हम सिम कार्ड insert कर सकते थे लेकिन अब phones में side में सिम कार्ड slot मिलते हैं जिसे open करनें के लिए एक pin की जरुरत होती है और फिर हम इसमें सिम कार्ड insert कर सकते हैं।

SIM ka kya upyog hai

आप अच्छी तरह से जानते हैं की आज पूरी दुनिया internet के जरिये एक दूसरे से connected है, आज अधिकतर काम internet के जरिए ही किये जा रहे हैं अधिकतर ऐसे काम हैं जोकि लोग घर से ही internet के जरिये कर लेते हैं।

आज internet लगभग हर तरह की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, और ये सब इसलिए possible हो सका है क्यूंकि हर व्यक्ति तक internet access कर पाता है जिसमें सबसे main role है सिम कार्ड का।

सिम कार्ड के जरिये आपको telecom companies internet provide हैं जिसका आपको charge देना होता है, यदि आप internet की deep जानकारी चाहते हैं तो इस article को पढ़ें, internet

लेकिन याद रहे की internet, सिम कार्ड के invention के बाद नहीं शुरू हुवा बल्कि internet सिम कार्ड के invention के बहुत पहले शुरू हो गया था, लेकिन उस condition में internet connection हर कोई नहीं access कर सकता था क्यूंकि उस time internet के connection के लिए कोई खास equipment नहीं था।

लेकिन सिम कार्ड के invention के साथ साथ और कई सारे technical invention हुए जिसनें communication की दुनिया को बदल कर रख दिया।

सिम कार्ड का अविष्कार 1991 में हुवा, और 1989 में Tim Berners-Lee ने www का अविष्कार किया, 1991 में http का अविष्कार और 1993 में html, computer programming language का अविष्कार, इन तीनों को Tim Berners-Lee ने ही invent किया था।

जिससे की internet की दुनिया में भी बहुत तेजी से क्रांति हुयी, क्यूंकि www के अविष्कार के बाद public website बनाना possible हो गया, हालाँकि इसमें तो सारा योगदान Tim Berners-Lee का था क्यूंकि SIM card और internet बिलकुल अलग हैं, बस इन्हें एक साथ communicate किया गया ताकि पूरी दुनिया internet access कर सके

क्यूंकि जहाँ तक बात है internet access करनें की तो आप बिना सिम कार्ड के भी internet access कर सकते हैं लेकिन यदि आप बिना सिम कार्ड के internet use करना चाहते हैं तो शायद वो आपको महंगा पड़ सकता है।

क्यूंकि उसके लिए आपको अलग से equipment लेना पड़ेगा जैसे की broadband और फिर आप boradband के जरिये internet access कर सकते हैं, लेकिन यदि सिम कार्ड पर internet service available ना होती तो शायद इतनें अधिक internet user ना होते जितनें की इस time हैं।

सभी सिम कार्ड के लिए registered mobile number

पूरी दुनिया में कितने active सिम कार्ड होंगे आप कल्पना नहीं कर सकते हैं क्यूंकि लगभग हर कोई mobile का इस्तेमाल करता है और बहुत लोग तो multiple सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं।

Telecom company द्वारा हर एक सिम कार्ड के लिए एक number provide किया जाता है जिसे हम mobile number के name से जानते हैं, और एक number के दो सिम कार्ड नहीं हो सकते, क्यूंकि यदि ऐसा होता तो identification में काफी problem होती, लेकिन मान लीजिये यदि कुछ ऐसा होता तो शायद code countrywise ना होकर state level या district level करना होता, और सभी calling के लिए codes compulsory होता।

लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है क्यूंकि एक mobile calling के लिए country level codes हैं जैसे की india के लिए +91, china +86, Germany +49 इत्यादि।

Portability

सिम कार्ड की ये सबसे अच्छी सुविधा है क्यूंकि यदि आपको उस सिम कार्ड की services अच्छी नहीं लग रही है या फिर network problem है तो आप किसी दूसरी company का सिम कार्ड खरीद सकते हैं या फिर चाहें तो उसी सिम कार्ड को किसी दूसरी company में port कर सकते हैं।

कोई दूसरा नया number लेनें से port करना ज्यादा better होता है क्यूंकि इससे आपका mobile नंबर नहीं change होता है बस सिर्फ आपके

Telecom company, सिम कार्ड के द्वारा की गयी activity को track कर सकता है?

वैसे तो आप जिस company के सिम कार्ड use करते हैं जिसके जरिये आप call करते हैं उसे telecom company कहते हैं लेकिन यदि वो company आपको internet service भी provide करती है तो आप उसे isp भी कह सकते है क्यूंकि वो आपको internet service provide कर रहा है, isp, तो आपको पता होगा की telecom company के पास आपके calls और mssages का पूरा data होता है।

यहाँ तक की telecom company आपको easily track कर सकता है, वो पता कर सकता है की आप कौन सा phone use कर रहे हैं। और यदि आप internet use कर रहे हैं तो वो isp यानीं की वो company जिसका आप सिम कार्ड use कर रहे हैं जिसके जरिये internet use कर रहे हैं वो easily track कर सकता है की आपनें internet पर क्या use किया।

लेकिन यदि आप चाहें तो vpn use करके tracking off कर सकते हैं, vpn के जरिये internet use करनें पर आपका isp आपको track नहीं कर पायेगा, और आप उन programs को भी use कर पाएंगे जो आपकी country में blocked हैं।

Sim card kitne prakar ke hote hian

Prepaid sim kya hai

prepaid सिम कार्ड ऐसे सिम कार्ड होते हैं जिन्हें आपको पहले reacharge करना होता है उसके बाद आप उसे इस्तेमाल कर सकते हैं, लगभग हर कोई prepaid SIM card ही use करता है, यानीं की prepaid SIM card debit card की तरह है आपके सिम कार्ड में जितना reacharge होगा उतना ही use कर पाएंगे।

Postpaid SIM kya hai

Postpaid सिम कार्ड में आपको use करनें के बाद payment करना होता है यानीं की credit card की तरह पहले use करो और फिर उसके बाद उसका bill pay करो।

prepaid की तरह आपको postpaid में भी कई सारे plans मिलेंगे, और plan के activate होनें पर आपको payment नहीं करना पड़ेगा और plan के अंत में आपको payment करना होगा।

इस लेख में आपने सीखा SIM kya hai और SIM full form in hindi हमें उम्मीद है ये जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।